• संतान प्राप्ति हेतु इन मंत्रों का करें जाप

    गणपतिआदिदेवहैंजिन्होंनेहरयुगमेंअलग-अलगअवतारलिया.गणेशभगवानगणोंकेस्वामीहैंइसलिएइनकाएकनामगणपतिभीहै.ज्योतिषमेंइनकोकेतुकादेवतामानाजाताहैऔर जोभीसंसारकेसाधनहैं, उनकेस्वामीश्रीगणेशजीहैं.जीवनमेंप्रत्येकशुभकार्यप्रारम्भकरनेकेपहलेगणेशकाहीपूजनकियाजाताहै.इससेसभीकार्यपूर्णताकोप्रदानकरतेहैं.प्रथमपूजनीयश्रीगणेशजीकोविनायक, विघ्नेश्वर, गणपति, लंबोदरकेनामसेभीजानाजाताहैं। श्रीगणेशमंत्रकाश्रद्धाकेसाथ 108 बारपाठकरनासंतानप्रदायकमानागयाहै। नमोस्तुगणनाथायसिद्धिबुद्धियुतायच सर्वप्रदायदेहायपुत्रवृद्धिप्रदायच गुरुदरायगरबेगोपुत्रेगुह्यासितायते गोप्यायगोपिताशेषभुवनायचिदात्मने विश्वमूलायभव्यायविश्वसृष्टिकरायते नमोनमस्तेसत्यायसत्यपूर्णायशुंडिने एकदंतायशुद्धायसुमुखायनमोनमः प्रपन्नजनपालायप्रणतार्तिविनाशिने...

  • भगवान गणेश जी के मंत्र

    गणपतिआदिदेवहैंजिन्होंनेहरयुगमेंअलग-अलगअवतारलिया.गणेशभगवानगणोंकेस्वामीहैंइसलिएइनकाएकनामगणपतिभीहै.ज्योतिषमेंइनकोकेतुकादेवतामानाजाताहैऔरजोभीसंसारकेसाधनहैं, उनकेस्वामीश्रीगणेशजीहैं.जीवनमेंप्रत्येकशुभकार्यप्रारम्भकरनेकेपहलेगणेशकाहीपूजनकियाजाताहै.इससेसभीकार्यपूर्णताकोप्रदानकरतेहैं.प्रथमपूजनीयश्रीगणेशजीकोविनायक, विघ्नेश्वर, गणपति, लंबोदरकेनामसेभीजानाजाताहैं। भगवानगणेशजीकेमंत्रनिम्नानुशारहैं: किसीभीकार्यकेप्रारंभमेंगणेशजीकोइसमंत्रसेप्रसन्नकरनाचाहिए: श्रीगणेशमंत्रऊँवक्रतुण्ड़महाकायसूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नंकुरूमेदेव, सर्वकार्येषुसर्वदा।। गणेशजीकोप्रसन्नकरनेकाएकमंत्रनिम्नभीहै: ऊँएकदन्तायविहेवक्रतुण्डायधीमहितन्नोदन्तिःप्रचोदयात्। निम्नमंत्रकाजापकरनेसेगणेशजीबुद्धिप्रदानकरतेहैं: श्रीगणेशबीजमंत्रऊँगंगणपतयेनमः।। गणेशजीकेइसमंत्रद्वारासिद्धिकीप्राप्तिहोतीहै। एकदंतायविद्महे, वक्रतुण्डायधीमहि,...

  • वैष्णो देवी के मंत्र

    माँवैष्णोदेवीमाँदुर्गाकाहीरूपहै, अपनेभक्तोकीरक्षाकरनेकेलिएमाँअम्बेअपनेविभिन्नरूपोंमेंआयाकरतीहैं| वैसेतोमाँअम्बेकोमनानाबहुतहीआसानहै, माँशारदाअपनेभक्तोसेश्रध्दाकीजगहकुछऔरनहींचाहती| फिरभीनीचेदियेगयेमंत्रोकाउच्चारणकरनेसेमाँअपनेभक्तोअवश्यप्रशन्नहोतीहैं| इसमंत्रकाउच्चारणकरतेहुएमातावैष्णोदेवीकोपाद्य(जल) समर्पणकरनाचाहिए- ॐसर्वतीर्थसमूदभूतंपाद्यंगन्धादि-भिर्युतम्अनिष्ट-हर्तागृहाणेदंभगवतीभक्त-वत्सला |ॐश्रीवैष्णवीनमःपाद्योःपाद्यंसमर्पयामि इसमंत्रकेद्वारामातावैष्णोदेवीकोदक्षिणाअर्पणकरनाचाहिए- हिरण्यगर्भ-गर्भस्थंहेमबीजंविभावसोःअनन्तंपुण्यफ़लदमतःशान्तिप्रयच्छमे | मातावैष्णोदेवीकीपूजाकेदौरानइसमंत्रकोपढ़तेहुएउन्हेंचन्दनसमर्पणकरनाचाहिए- ॐश्रीखण्ड-चन्दनंदिव्यंगन्धाढ्यंसुमनोहरम्विलेपनमातेश्वरीचन्दनंप्रति-गृहयन्ताम् | इसमंत्रकेद्वारामातावैष्णोदेवीकादधिस्नानकरनाचाहिए- पयस्तुवैष्णोसमुद-भूतंमधुराम्लंशशि-प्रभम्दध्या-नीतंमयास्नानार्थप्रति-गृहयन्ताम्...

  • सरस्वती माता मंत्र और मंत्र का अर्थ हिंदी में

    भारतीयधर्मशास्त्रोंएवंपुराणोंमेंदेवी-देवताकेपूजनएवंस्तुतिकेलिएअनेकोनेकमंत्ररचेगएहैं. ॐसरस्वत्यैनमः मंत्रमांसरस्वतीकोप्रसन्नकरनेकाएकअद्भुदतउपायहै. जबभीकोईपरीक्षादेनेजाएतबइसमंत्रकोसच्चेमनसेमांसरस्वतीकास्मरणकर 7 बारपढ़ें.सरस्वतीपूजनकेसमययहश्लोकपढ़नेसेमांकीअसीमकृपाप्राप्तहोतीहै.समयाभावमेंमात्रएकबारभीघीकादीपकजलाकरपढ़ाजासकताहै. मांसरस्वतीकाश्र्लोक ॐश्रीसरस्वतीशुक्लवर्णांसस्मितांसुमनोहराम्।। कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्। वह्निशुद्धांशुकाधानांवीणापुस्तकमधारिणीम्।। रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्। सुपूजितांसुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।। वन्देभक्तयावन्दिताचमुनीन्द्रमनुमानवै:। जोलोगसरस्वतीकेकठिनमंत्रकाजपनहींकरसकते।वेमांसरस्वतीकासरलअष्टाक्षरमंत्रकाजापकरें.इसमंत्रकापाठनित्यकरनेसेविद्याऔरबुद्धिमेंवृद्धिहोतीहै.यहमंत्रदेवीसरस्वतीकामूलमंत्रहै. शारदाशारदाभौम्वदना।वदनाम्बुजे। सर्वदासर्वदास्माकमंसन्निधिमंसन्निधिमंक्रियातू।’ श्रींह्रींसरस्वत्यैस्वाहा।...

  • बाबा भैरवनाथ की आराधना के मंत्र

    भैरवआराधनाकेखासमंत्रनिम्नानुसारहै:- ‘ॐकालभैरवायनम:।’ ॐभयहरणंचभैरव:।’ ‘ॐह्रींबटुकायआपदुद्धारणायकुरूकुरूबटुकायह्रीं।’ ‘ॐहंषंनंगंकंसंखंमहाकालभैरवायनम:।’ ‘ॐभ्रांकालभैरवायफट्।’

  • चंद्रमां को अर्घ प्रदान करने के विशेष मंत्र

    मंत्रोंकाहमारेजीवनमेंबहुतमहत्वहै, बिनामंत्रोंकेकिसीभीपूजा/आराधनाकोपूर्णनहींमानाजासकता, मंत्रोंकेउच्चारणसेघरमेंपॉज़िटिवएनर्जिआतीहै। चन्द्रदेवमहर्षिअत्रिऔरमाताअनुसूयाकेपुत्रमानेजातेहैं।इनकावर्णगौरहै।चंद्रदेवअनादिएवंअजेयहैं।चंद्रदेवकेवस्त्र, अश्वऔररथश्वेतरंगकेहैं।शंखकेसमानउज्जवलदसघोड़ोंवालेअपनेरथपरयेकमलकेआसनपरविराजमानहैं।इनकेएकहाथमेंगदाऔरदूसराहाथवरमुद्रामेंहै।इन्हेंसर्वमयकहागयाहै।येसोलहकलाओंसेयुक्तहैं।भगवानश्रीकृष्णनेइनकेवंशमेंअवतारलियाथा, इसीलियेवेभीसोलहकलाओंसेयुक्तथे। चतुर्थीतिथिकोचंद्रमांकोअर्घप्रदानकरनेकाविशेषमहत्तवहै।इसमंत्रकेसाथचंद्रमांकोअर्घप्रदानकरनाचाहिए क्षीरोदार्णवसम्भूतअत्रिगोत्रसमुद्भव। गृहाणाध्र्यंशशांकेदंरोहिण्यसहितोमम।।

  • नवग्रह मंत्र

    नवग्रहोंकेनामएवंउनकेतांत्रिकमंत्रतथाआवाहनमंत्रइसप्रकारहै: सूर्यकाआवाहनमंत्र तांत्रिकमंत्र : ऊॅंह्रांहृींहृौंसःसूर्यायनमः. आवाहनमंत्र : पासनःपद्यकरःपगर्भःसमद्युतिः. चन्द्र तांत्रिकमंत्र : ऊॅंश्रांश्रींश्रौंचन्द्रमसेनमः. आवाहनमंत्र : श्वेतःश्वेताम्बरधरःश्वेताश्चःश्वेतवाहनः. गदापाणिद्र्विबाहुश्चकर्तव्योवरदःशशी. मंगल...

  • शिव का मंत्र

    देवोंकेदेवमहादेवके विशेषमंत्रोंकेजापसेउनकीकृपाशीघ्रप्राप्तहोतीहै, जिससेसाधकअपनीमनोकामनाकीपूर्तिकरकेजीवनमेंसफलता-सुख-शांतिप्राप्तकरताहै. प्रस्तुतमंत्रकाशिवरात्रिसेलेकरप्रतिदिनजपकरनेसेसुख, अपारधनसंपदा, अखंडसौभाग्यऔरप्रसन्नतामेंवृद्धिहोतीहै.जपकरनेकेलिएरुद्राक्षकीमालाकाउपयोगकरनाचाहिए. मंत्रोंकाजापपूर्वयाउत्तरदिशाकीओरमुखकरकेकरनाचाहिए. जपकेपूर्वशिवजीकोबिल्वपत्रअर्पितकरनाचाहिए. उनकेऊपरजलधाराअर्पितकरनाचाहिए. शिवकामंत्र ॐनमःशिवाय शिवकोप्रसन्नकरनेतथाउनकीशरणागतपानेकेलिएभगवानशिवकेपंचाक्षरीमंत्रकाअत्यंतमहत्वहै.इसकेसाथहीशिवभगवानकाव्रततथापूजनअवश्यकरनाचाहिए. शिवव्रतकरनेवालेव्यक्तिसांसारिकभोगोंकोभोगनेकेपश्चातअंतमेंशिवलोकमेंजातेहै.चतुर्दशीतिथिकोइसपंचाक्षरीमंत्र (ॐनमःशिवाय) काजापअवश्यहीकियाजानाचाहिएऎसाकरनेसेमनुष्यसभीतीर्थोंकेस्नानकाफलप्राप्तकरताहै भगवानशिवकोप्रसन्नकरनेकेलिएकईस्तुतियोंकीरचनाप्राप्तहोतीहैइनसभीकेमध्यमेंशिवपंचाक्षरस्त्रोतएकमहत्वपूर्णमंत्रसाधनाहै.इसकाप्रतिदिनजापकरनेसेभगवानशंकरशीघ्रहीप्रसन्नहोतेहैंतथाउनकाआशिर्वादएवंसानिध्यप्राप्तहोताहै. शिवपंचाक्षरस्त्रोत...

  • राम का मंत्र

    हिन्दूधर्ममेंभगवान रामकाअत्यंतमहत्त्वपूर्णस्थानहै. भगवानरामएकआदर्शपतिआदर्शपुरुषआदर्शपुत्रऔरआदर्शपिताकेरूपमेंपूजेजातेहैं. सभीपुरुषोंमेंउत्तमहोनेकेकारणभगवानरामकोपुरुषोत्तमभीकहाजाताहै.राममंत्रतीनअक्षरोंर’, ‘अ’ और ‘म’ केयोगसेबनताहै.जिसमें ‘र’ अग्निवाचकहै.’अ’ बीजमंत्रहै.’म’ काअर्थज्ञानहै.यहमंत्रपापोंकोजलाताहै, किंतुपुण्यकोसुरक्षितरखताहैऔरज्ञानप्रदानकरताहै.रामकेसरलऔरछोटेमंत्रोंकाहररोजअथवारामनवमीपरजापकरनेसेसभीमनोकामनापूरीहोतीहै. रामकामंत्र ॐश्रीरामचन्द्रायनमः

  • द्वादश ज्योति र्लिंगस्तोत्र

    द्वादशज्योतिर्लिंगस्तोत्रमेंशिवजीके 12 प्रमुखस्थानकावर्णनहै।जहांपरदिव्यज्योतिर्लिंगरुपस्थितहैं।शिवकाज्योतिर्मयस्वरुपकादर्शनसभीपापोंसेमुक्तिदिलानेवालावमनकोनिर्मलकरनेवालाकहागयाहै।इसपावनस्त्रोतकेजपसेइन 12 प्रमुखतीर्थस्थानकेदर्शनकाफलप्राप्तहोताहै। सौराष्ट्रदेशेविशदेऽतिरम्येज्योतिर्मयंचन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानायकृपावतीर्णंतंसोमनाथंशरणंप्रपद्ये।।1।। जोभगवान्शंकरअपनीभक्तिप्रदानकरनेकेलिएपरमरमणीयवस्वच्छसौराष्ट्रप्रदेशगुजरातमेंकृपाकरकेअवतीर्णहुएहैं।मैंउन्हींज्योतिर्मयलिंगस्वरूप, चन्द्रकलाकोआभूषणबनाएहुएभगवान्श्रीसोमनाथकीशरणमेंजाताहूं। श्रीशैलशृंगेविबुधातिसंगेतुलाद्रितुंगेऽपिमुदावसन्तम्। तमर्जुनंमल्लिकपूर्वमेकंनमामिसंसारसमुद्रसेतुम्।। 2।। ऊंचाईकीतुलनामेंजोअन्यपर्वतोंसेऊंचाहै।जिसमेंदेवताओंकासमागमहोतारहताहै।ऐसेश्रीशैलश्रृंगमेंजोप्रसन्नतापूर्वकनिवासकरतेहैं।जोसंसारसागरकोपारकरनेकेलिएसेतुकेसमानहैं।उन्हींएकमात्रश्रीमल्लिकार्जुनभगवान्कोमैंनमस्कारकरताहूँ। अवन्तिकायांविहितावतारंमुक्तिप्रदानायचसज्जनानाम्। अकालमृत्योःपरिरक्षणार्थंवन्देमहाकालमहासुरेशम्।। 3।। जोभगवान्शंकरसंतजनोंकोमोक्षप्रदानकरनेकेलिएअवन्तिकापुरीउज्जैनमेंअवतारधारणकिएहैं,...